यूपी में मुकेश सहनी का बड़ा ऐलान, 'आरक्षण नहीं तो वोट नहीं', संजय निषाद को दी 6 महीने की मोहलत : ABP News
उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण की मांग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है. विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने प्रदेश में अपने रात्रि प्रवास अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सूबे की सियासत में हलचल मचा दी है. सहनी ने न केवल केंद्र व राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी है, बल्कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद पर भी वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है.
बस्ती सहित समूचे पूर्वांचल में निषाद समाज के लोगों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में जुटे मुकेश सहनी ने घोषणा की है कि आरक्षण के अधिकार की प्राप्ति के लिए समाज जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश में एक विशाल ‘संकल्प यात्रा’ निकालेगा. इस यात्रा के दौरान लाखों निषाद भाई अपने हाथों में गंगाजल लेकर 'आरक्षण नहीं तो वोट नहीं' का दृढ़ संकल्प लेंगे. साहनी ने कहा कि निषाद समाज का उत्तर प्रदेश में 12 प्रतिशत से अधिक का मजबूत वोट बैंक है, जो आने वाले चुनाव में सत्ता का रुख तय करेगा.
'कैबिनेट मंत्री मलाई खाने में व्यस्त'
कहा हम गंगापुत्र और केवट महाराज के वंशज हैं जिन्होंने प्रभु श्रीराम को पार लगाया था. अगर हमारे समाज ने हाथ में गंगाजल लेकर संकल्प ले लिया, तो कोई भी आर्थिक प्रलोभन उन्हें उनके वचन से नहीं डिगा पाएगा. प्रेस वार्ता के दौरान मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, संजय निषाद आज इसी शोषित समाज के संघर्ष और आंदोलन के दम पर मंत्री की लालबत्ती गाड़ी में घूम रहे हैं. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि मंत्री बनते ही वे समाज के हक अधिकारों और आरक्षण की मांग को भूल चुके हैं और केवल मलाई खाने में व्यस्त हैं.
मंत्री पद छोड़ने का अल्टीमेटम!
साहनी ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में छह महीने की मोहलत देते हुए कहा कि यदि वे सरकार से निषाद समाज को आरक्षण नहीं दिला पा रहे हैं, तो उन्हें मंत्री पद को लात मारकर विपक्ष की संघर्षपूर्ण राजनीति में वापस आना चाहिए, अन्यथा समाज उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. देश की व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों पर बात करते हुए मुकेश सहनी ने राहुल गांधी के विचारों का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि "जितनी आबादी, उतना हक" और देश में जातीय जनगणना कराने की मांग बिल्कुल तार्किक है. जब दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में निषाद समाज की उपजातियों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो उत्तर प्रदेश में इस हक से समाज को वंचित क्यों रखा जा रहा है? उन्होंने चेतावनी दी कि विधानसभा चुनाव से पहले यदि सरकार ने आरक्षण नहीं दिया, तो समाज एकजुट होकर सरकार को सत्ता से बेदखल करने का काम करेगा.
'पार्टी नहीं, दुकान चला रहे हैं': निजी समझौतों पर निशाना
मुकेश साहनी ने कहा कि जल्द ही वह समय आएगा जब संजय निषाद को पता चल जाएगा कि इनके पास समर्थन है और किसके पास समर्थन नहीं है. आप भी जानते हैं कि यह निषाद समाज जो है, लड़ने वाला जात है. यह कॉम्प्रोमाइज वाला जात नहीं है. हां, कोई व्यक्ति अगर कॉम्प्रोमाइज हो जाए तो बात अलग है, लेकिन यह समाज कभी पीछे हटने वाला वाला नहीं है. डॉक्टर साहब कॉम्प्रोमाइज हो चुके हैं, एक टिकट पर... अपने बेटा को सांसद बनाने के लिए 2019 में समझौता कर लेते हैं. एक टिकट के लिए 2018 में अखिलेश जी से समझौता कर लेते हैं. यह पार्टी नहीं, दुकान चला रहे हैं. यह उत्तर प्रदेश के निषाद को पता है. और दुकान के साथ कोई भी नहीं रहेगा, निषाद जो है हमेशा लीडर के साथ रहेगा.